डेप्सांग में चीनियों ने गाड़े तम्बू , मिलिट्री व्हीकल-तोपें भी पहुंचाईं, भारत ने तानी भीष्म


चीन ने  उत्तरी लद्दाख में  भारतीय दावे वाले क्षेत्र में घुसपैठ की है। सेना की तरफ से हालांकि इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन मीडिया में आई उपग्रह की तस्वीरों से साफ दिखता है कि डेप्सांग सेक्टर में चीनी सेना की उपस्थिति देखी गई है। यहां उसने कुछ स्थाई निर्माण किये हैं और तंबू भी लगाये हैं। साथ ही दो सड़कें भी बनाई हैं। एलएसी के निकट चीनी सैनिकों की उपस्थिति बढ़ी है, जिसके बाद भारत ने भी अपने सैनिक बढ़ा दिये हैं। इधर खबर है कि भारत ने भी बेहद कारगर मानेजाने वाले टैंक भीष्म को लद्दाख में तैनात कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी से 30 किलोमीटर और डेप्सांग से 21 किलोमीटर दूर बड़ी संख्या में सेना तैनात की है। यहां कैम्पों में सैन्य गाड़ियां और तोप भी पहुंचने लगी हैं। चीन इस इलाके में पेट्रोलिंग प्वाइंट 10 से 13 के बीच भारतीय सेना के लिए मुश्किल खड़ी करना चाहता है। वह काराकोरम दर्रे के पास के इलाकों में कब्जा करना चाहता है, ताकि उसे पाकिस्तान जाने वाले हाईवे के लिए रास्ता मिल जाये। भारत ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण को रोक दिया था। इससे पहले चीन और भारत के बीच गलवान घाटी, पैंगोग सो और हॉट स्प्रिंग्स इलाके में तनाव जारी है।
         एक सैटेलाइट इमेज से नया खुलासा हुआ है। इस हाई रेजोल्यूशन इमेज में गलवान नदी के आसपास लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के दोनों ओर चीनी सेना के कई निर्माण या कैम्प साफतौर पर दिखाई दिये हैं। रिपोर्ट्स में इस दावे से जुड़ी तस्वीर जारी की गईं। रिटायर्ड मेजर जनरल रमेश पधी ने सैटेलाइट इमेज पर कहा कि चीन ने गलवान घाटी में पूरी प्लानिंग के साथ सेना की गाड़ियां और साजो-सामान जमा कर लिया था ताकि वह लंबे समय तक यहां डटा रहे।
             गलवान घाटी में हुये एक तरफ चीन से तनाव कम करने को लेकर सैन्य एवं कूटनीतिक स्तर पर वार्ताएं चल रही हैं, वहीं यह नया खुलासा चिंता पैदा करता है। सूत्रों का कहना है कि ये तस्वीरें जून महीने की हैं तथा इसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी उपस्थिति उस इलाके में बढ़ा दी है। बड़े पैमाने पर भारतीय सुरक्षा बलों की वहां मौजूदगी है। सूत्रों के अनुसार डेप्सांग सेक्टर दौलतबेग ओल्डी से पूर्व की दिशा में है तथा लद्दाख का यह उत्तरी इलाका है।


  ये घटनाएं 22 जून से पहले की हैं। बता दें कि 22 जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता में पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले स्थानों से तनाव कम करने पर सहमति हुई है, लेकिन यह टकराव का नया मोर्चा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि एलएसी के निकट चीनी सेना की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है