अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत एवं आर्य जगत के ख्यातिलब्ध विद्वान् पद्मश्री डॉ कपिल देव द्विवेदी की 15वीं पुण्यतिथि पर जन समुदाय ने यज्ञ में आहुति एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। यज्ञोपरांत संबोधित करते हुए प्रोफेसर डी पी सिंह ने डॉक्टर कपिल देव द्विवेदी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा डॉक्टर कपिल देव द्विवेदी महर्षि दयानंद सरस्वती के एक आदर्श अनुयायी थे एवं स्वामी दर्शनानंद के प्रिय भक्त थे। डॉक्टर कपिल देव द्विवेदी ने पाणिनि, पतंजलि, भर्तृहरि द्वारा प्रशस्त मार्ग का अनुगमन किया और इस मार्ग का पथिक बनाकर संस्कृत को समृद्ध किया। डॉ कृष्णावतार त्रिपाठी राही ने कहा वे ऋषि तुल्य जीवन व्यतीत करने वाले तथा वैदिक परंपरा के संत थे । वह संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के प्रतिमान थे। डॉ राज कुमार पाठक ने कहा डाक्टर द्विवेदी जी मातृभूमि के पुजारी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे । वह ऋषि तुल्य जीवन वाले भारतीय संस्कृति के पोषक , संस्कृत भाषा के सरलीकरण और वेदों का ज्ञान जन सामान्य तक पहुंचाने वाले विद्वान थे। वे संस्कृत व्याकरण भाषा विज्ञान दर्शन और वेदों के अप्रतिम विद्वान थे । उनके लिखे गए ग्रंथ अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। उन्होंने स्वामी दयानंद के वेद प्रचार के स्वप्न को साकार करने के लिए न केवल दो वेद कंठस्थ किया अपितु 40 भागों में वेदामृतम् ग्रंथमाला की रचना कर वेदों को जन सामान्य तक पहुंचाया । वेद मंत्रों से यज्ञ में आहुति देकर डॉ द्विवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई । इस अवसर पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने डॉक्टर द्विवेदी को वैदिक विद्वत परंपरा के बहुमूल्य रत्न , आर्य धर्म के साधक और प्रचारक, व्याकरण शास्त्र के अप्रतिम विद्वान, संस्कृत साहित्य के संपोषक , मृदु भाषी , राष्ट्र प्रेमी के रूप में स्मरण किया । इस अवसर पर राम राज, कन्हैया लाल आर्य , विजय नाथ आर्य, राम फेरने शास्त्री, शीतला प्रसाद गुप्ता, डॉ राम मुरत गुप्ता, डॉ कृष्ण अवतार त्रिपाठी राही, अब्दुल वहीद अंसारी, हरेंद्र प्रताप सिंह , अरविंद भट्टाचार्य, डॉक्टर शिव नरेश मिश्रा , डॉक्टर जेपी सिंह , राजेंद्र कुमार यादव ओमप्रकाश पांडे घनश्याम दास गुप्ता चेयरमैन, अजीता प्रसाद पांडे राजीव गोयल, विजय नाथ डॉ ऋचा तथा जनपद के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। डॉ भारतेन्दु द्विवेदी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया ।